Browsing Category

Hindi Jokes

हिंदी चुटकुले – New Funny Hindi Jokes, Top Hindi Chutkule, Latest Hindi Laughter Quotes, Famous Hindi Comedy, Best Funny Hasgulle in Hindi Language.

Hindi Jokes

सबसे ज्यादा झूठ वाले पत्र

दुनिया के इन दो पत्रों में सबसे ज्यादा झूठ बोला जाता है…
.
.
.
लड़की को दिए प्रेम पत्र और
छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र में।

कीर्तीश, नोएडा

Hindi Jokes

महिलाओं की अद्भुत क्षमता

अड़ोसी-पड़ोसी और ऊपर-नीचे रहने वाले लोगों के बर्तनों में से…
.
.
.
अपने बर्तन पहचान लेने की
अद्भुत क्षमता सिर्फ महिलाओं के पास होती है।

सरोज, नोएडा

Hindi Jokes

NZ के फैन ने कहा भारत माता की जय, विडियो सोशल मीडिया पर वायरल

सैमुअल सिंह को तो आप भी जानते होंगे! वह विदेशी शख्स जो हिंदी गाने गाकर यूट्यूब पर ट्रेंड बन चुका है और अभी तक 6.5 लाख के करीब सब्सक्राइबर जोड़ चुका है। किसी विदेशी के मुंह से हिंदी सुनना हम सभी को अच्छी फीलिंग देता है। अब सोचिए कि कोई विदेशी अगर बोले तो कैसा लगेगा और वह भी पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ? ऐसा ही कुछ हुआ है, भारत vs न्यू जीलैंड के बीच खेले गए मैच में।

यहां दर्शक दीर्घा में बैठे भारतीय फैंस ने न्यू जीलैंड के फैन से भारत माता की जय बुलवाई जिसका विडियो ट्विटर पर वायरल हो गया। दरअसल ट्विटर पर भैयाजी नाम के यूजर ने एक विडियो पोस्ट किया है। मैच देखने के लिए स्टेडियम में कई फैंस बैठे हुए हैं। वहां पर कुछ भारतीय फैंस के साथ एक न्यू जीलैंड का फैन भी बैठा है। सब लोग मिलकर NZ के फैन से भारत माता की जय बुलवाते हैं। फैन ने जितने जोश से भारत माता की जय बोला है, उसे देखकर एक बार आप भी मुस्कुरा जाएंगे।
पहले आप भी विडियो देखिए…

बीच में कुछ लोग से इंकलाब जिंदाबाद बोलने के लिए भी कहते हैं। वायरल हो रहा विडियो भारत और न्यू जीलैंड के बीच ऑकलैंड के ईडन पार्क में हुए टी20 मैच का है। ट्वीट होने के बाद से यह 1300 से अधिक बार रीट्वीट हो चुका है। यह विडियो लोगों को काफी हंसा रहा है। हाल ही में न्यू जीलैंड के ओपनिंग बैट्समैन का भी एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वह चहल को हंसी-मजाक में ‘अपशब्द’ कहते नजर आ रहे हैं। देखिए लोगों ने रिप्लाइ में क्या कहा है…

Hindi Jokes

IIM की फीस बढ़ने का विरोध नहीं करने पर कौनसा बहाना बनाएंगे ‘बुद्धिजीवी’ छात्र?

ऋषि कटियार
प्रिय लेखक मित्रों, बुद्धिजीवियों, क्रांतिकारियों, समाज सेवकों, स्वंयभू मठाधीशों और फलाना-ढिकाना जी, शायद बिजी होने की वजह से आपको न्यूज पता न चली हो और वैसे भी यह अंग्रेजी अखबारों के कोने में एक छोटी सी दबी छुपी हुई सी खबर भी थी। खबर यह है कि IIM बैंगलोर की फीस 21 लाख से 23 लाख कर दी गई जिसमें टैक्स, मेस फीस, सिक्यॉरिटी डिपॉजिट आदि अलग से है।

है ना, पता नहीं चला ना या कोई फर्क नहीं पड़ा। आप वही हैं ना, जिन्होंने अभी कुछ दिन पहले ही दिल्ली में एक विश्वविद्यालय की फीस बढ़ने पर क्रांति मचाई थी। महाकाव्य रचे थे, गीत गाए थे। अपनी कलम की धार पैनी की थी। मुफ्त शिक्षा, समान अधिकार, गरीबों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश, शिक्षा पर सबका अधिकार, दुनियाभर के शिक्षा मॉडल्स की विवेचना की थी। नहीं, मुझे इससे दिक्कत नहीं कि तब आप क्यों बोले थे। मुझे इससे दिक्कत है कि अब आप चुप क्यों हैं? यह जो सिलेक्टिव अप्रोच है ना, मुझे उससे दिक्कत है।

नहीं, मुझे उस यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी खुन्नस नहीं, आखिर मुफ्त का माल कौन नहीं चाहता? मुझे तो आपसे जवाब की दरकार है जो अचानक से धृतराष्ट्र हो गए हैं क्योंकि आपकी नज़र में उक्त विश्वविद्यालय से तो आईएएस/पीसीएस निकलते हैं, IIM /IIT से तो कोई निकलता ही नहीं है। चलिए आप की भी मजबूरियां रही होंगी, यूंही कोई बेवफा नहीं होता। मैं आपको कुछ बहाने देता हूं, सुविधानुसार चुन लीजिए…

1. मुझे तो पता ही नहीं चला। मैं तो साहित्य रचना/सेवा में और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार (अपनी किताब की मार्केटिंग) में व्यस्त था।

2. 21 से 23 लाख न, मात्र 8 प्रतिशत ही तो फीस बढ़ी है। उसके लिए क्या लिखना? हमारी यूनिवर्सिटी में तो सैकड़ों प्रतिशत बढ़ी थी। टोटल क्या थी, वह मत देखिए, प्रतिशत देखिए जनाब प्रतिशत।

3. मैं फ्री शिक्षा का पैरोकार तो हूं लेकिन इन पर सरकार बहुत खर्च भी तो करती है। आखिर फिस्कल डेफिसिट भी तो कोई चीज है।

4. अरे, यहां से पढ़ने वालों की तो नौकरी लग ही जाती है और उन्हें लोन भी मिल जाता है। उनके सामने उम्र पड़ी है, वे चुका भी सकते हैं जबकि विशेष यूनिवर्सिटी वाले ‘बुजुर्ग’ छात्र जो अफ्रीका के इकोसिस्टम पर साइबेरियन गधों का प्रभाव या टिम्बकटू में जुलु भाषा पर तुलु भाषा का अतिक्रमण जैसे महान विषयों पर शोध में रत हैं, उनकी नौकरी का क्या ठिकाना। उन बेचारों तो घर ही यही है।

5. यार, यह वाला इशू हो चुका है। अब इसमें वो मजा नहीं रहा। कुछ नया तड़कता-भड़कता माल/मामला लाओ तो लिखा जाए।

6. मैं आपको जवाब देने का ताबेदार नहीं, मैं वही लिखता हूं जो मेरी अंतरात्मा कहती है (जो कि अभी सो रही है)।

7. अरे IIT/IIM की फीस तो हर दूसरे साल बढ़ जाती है। हमारी यूनिवर्सिटी की तो आखिरी बार तब बढ़ी थी जब हम 5 रुपये लेकर मेला देखने जाते थे और जब अधिकतर हीरो घर से भाग के और जेब में 5 रुपये मुंबई शहर में आते थे। IIT/IIM में फीस बढ़ना उतना ही नॉर्मल है जितना हर दूसरे दिन पेट्रोल के दाम बढ़ना जबकि हमारी यूनिवर्सिटी की फीस बढ़ना जैसे- पंत का 20 गेंद क्रीज पर टिकने जैसा महान वन्स इन आ लाइफ टाइम रचनाशीलता दिखाने का मौका है।

8. यार, इस बात पर किसी नेता ने कोई टिप्पणी नहीं की जिसका समर्थन या विरोध किया जा सके। किसी मीडिया ने इसे कवर नहीं किया, कोई बवाल नहीं, आवाज़ तो IIM वालों को उठानी है। अगर वे भी सड़कें रोकें, बसें फूंकें, आज़ादी के नारे लगाएं, तब मुद्दा थोड़ा गरम हो, लोग पढ़ने को उत्सुक हों, तभी तो लिखने का मतलब है ना।

9. मैं तो कभी IIM गया ही नहीं, मुझे क्या? और वैसे भी वे सब ‘देशद्रोही’ हैं। पढ़ लिखकर बढ़िया अवसर के लिए विदेश भाग जाएंगे। देशप्रेमी तो वे हैं जो जिस स्कूल में पढ़े, वहीं चौकीदार बन जाएं या उसके बाहर मूंगफली या चाय बेचें।

10. तुम हो कौन? मेरे पास पढ़कर इग्नोर करने का ऑप्शन भी है, भाड़ में जाओ बे। वैसे भी अभी बरसात नहीं आई तो टर्राने का क्या फायदा?

आपका कौन सा बहाना है?