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Sad Shayari

Tokhrein Kha Kar

मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
मौसम की तरह लोग… बदल जाते हैं,
हम अभी तक हैं, गिरफ्तार-ए-मोहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि संभल जाते हैं।

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